मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम,2010 (क्रमांक 24 सन् 2010) की धारा 10 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राज्य सरकार, एतद्द्वारा आवेदन, अपील, पुनरीक्षण, शास्ति की वसूली और प्रतिकर के भुगतान के लिए प्रक्रिया अधिकथित करने के लिए निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात्:-

नियम

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ:- (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी (आवेदन, अपील,पुनरीक्षण, शास्ति की वसूली तथा प्रतिकर का भुगतान) नियम, 2010 है। (2) ये दिनांक 25 सितंबर, 2010 सेे प्रवृत्त होंगे।

2. परिभाषाएं:- इन नियमों में,जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,- (क) ‘‘अधिनियम’’ से अभिप्रेत है मध्य प्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010(क्रमांक 24 सन् 2010) (ख) ‘‘प्ररूप’’ से अभिप्रेत है इन नियमों से संलग्न प्ररूप; (ग) ‘‘पुनरीक्षण अधिकारी’’ से अभिप्रेत है, अधिनियम की धारा 8 के अंतर्गत पुनरीक्षण के लिए राज्य शासन द्वारा नाम निर्दिष्ट अधिकारी। (घ) ‘‘धारा’’ से अभिप्रेत है अधिनियम की धारा; (2) उन शब्दों और अभिव्यक्तियों के, जो इन नियमों में प्रयुक्त किये गये हैं किन्तु परिभाषित नहीं किये गये हैं के वही अर्थ होंगे, जो अधिनियम में उनके लिए दिये गये है ।

3. आवेदन प्राप्त करने हेतु पदाभिहित अधिकारी द्वारा प्राधिकृत किया जाना - पदाभिहित अधिकारी, आदेश द्वारा, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी को आवेदन प्राप्त करने एवं उसकी अभिस्वीकृति देने के लिए प्राधिकृत कर सकेगा ।

4. आवेदक को अभिस्वीकृति जारी किया जाना - नियम 3 के अधीन प्राधिकृत व्यक्ति आवेदक को प्रारूप-1 में अभिस्वीकृति देगा और यदि आवेदन के साथ कोई आवश्यक दस्तावेज संलग्न नहीं किये गये है, तो उसका स्पष्ट उल्लेख अभिस्वीकृति में किया जायेगा और ऐसी अभिस्वीकृति में, निश्चित की गई, समय-सीमा का उल्लेख नहीं किया जाएगा: परंतु यदि आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज संलग्न किए गए हैं तो अभिस्वीकृति में निश्चित की गई समय-सीमा का उल्लेख किया जाएगा ।

5. निश्चित की गई समय-सीमा में सार्वजनिक अवकाश सम्मिलित नहीं होंगें - सेवाएं प्रदान करने के लिये निश्चित की गई समय-सीमा की गणना में सार्वजनिक अवकाश सम्मिलित नहीं किए जाएंगे ।

6. नोटिस बोर्ड पर जानकारी का प्रदर्शित किया जाना - पदाभिहित अधिकारी, आम जनता की सुविधा के लिए सेवाओं से संबंधित सुसंगत जानकारी कार्यालय के किसी सहजदृश्य स्थान पर लगाए गए नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करवाएगा । नोटिस बोर्ड पर अधिसूचित सेवाएं प्राप्त करने के लिए दिए जाने वाले आवेदन के साथ दिए जाने वाले आवश्यक दस्तावेज प्रदर्शित किए जायेंगे ।

7. न्यायालय शुल्क में छूट - अपील अथवा पुनरीक्षण आवेदन के साथ कोई न्यायालय शुल्क देय नहीं होगा ।

8. अपील और पुनरीक्षण के आवेदन की अन्तर्वस्तु - प्रथम अपील अधिकारी, द्वितीय अपील प्राधिकारी या पुनरीक्षण अधिकारी को प्रस्तुत यथास्थिति किसी अपील या पुनरीक्षण के आवेदन में निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित की जाएगी, अर्थात्ः- (एक) अपीलार्थी या पुनरीक्षण चाहने वाले व्यक्ति का नाम और पता; (दो) यथास्थिति, उस पदाभिहित अधिकारी, प्रथम अपील अधिकारी अथवा द्वितीय अपील प्राधिकारी का नाम और पता जिसके विनिश्चय के विरूद्ध अपील अथवा पुनरीक्षण प्रस्तुत किया गया है; (तीन) उस आदेश की, जिसके विरूद्ध अपील अथवा पुनरीक्षण किया गया है, विशिष्टियाॅं, (चार) यदि अपील पदाभिहित अधिकारी द्वारा आवेदन की अभिस्वीकृति नहीं देने के विरूद्ध की गई है, तो आवेदन की तारीख तथा उस पदाभिहित अधिकारी का, जिसको आवेदन किया गया था, नाम और पता; (पाॅंच) अपील अथवा पुनरीक्षण के आधार; (छह) चाही गई राहत; (सात) कोई अन्य सुसंगत जानकारी जो अपील अथवा पुनरीक्षण का विनिश्चय करने के लिये आवश्यक हो ।

9. अपील अथवा पुनरीक्षण के साथ संलग्न किये जाने वाले दस्तावेज:-प्रत्येक अपील अथवा पुनरीक्षण के साथ निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किये जायेंगे; अर्थात्:- (एक) उस आदेश की, जिसके विरूद्ध अपील अथवा पुनरीक्षण किया जा रहा है, स्वप्रमाणित प्रति, (दो) अपील अथवा पुनरीक्षण के आवेदन में उल्लिखित दस्तावेजों की प्रतियां; (तीन) अपील अथवा पुनरीक्षण के आवेदन के साथ संलग्न दस्तावेजों की अनुक्रमणिका; (चार) पुनरीक्षण के आवेदन की दशा में शास्ति जमा किये जाने का सबूत और ऐसे सबूत के बिना पुनरीक्षण के लिए प्रस्तुत किया गया है कोई आवेदन सुनवाई हेतु ग्राह्य नहीं किया जायेगा ।

10. अपील अथवा पुनरीक्षण का विनिश्चय करने में प्रक्रिया:- अपील अथवा पुनरीक्षण आवेदन का विनिश्चय करने में- (एक) सुसंगत दस्तावेजों, लोक अभिलेखों या उनकी प्रतियों का निरीक्षण किया जायेगा; (दो) यदि अपेक्षित हो तो यथोचित् जांच के लिये किसी अधिकारी को प्राधिकृत किया जा सकेगा । (तीन) यथास्थिति, पदाभिहित अधिकारी या प्रथम अपील अधिकारी को, पुनरीक्षण के समय सुना जा सकेगा ।

11. सुनवाई की सूचना की तामील:- अपील अथवा पुनरीक्षण आवेदन की सुनवाई की सूचना, निम्नलिखित में से किसी एक रीति में, तामील की जा सकेगी; (एक) स्वयं पक्षकार द्वारा; (दो) आदेशिका वाहक के माध्यम से दस्ती परिदान द्वारा; (तीन) अभिस्वीकृति देय रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा; (चार) विभाग के माध्यम से ।

12. अपीलार्थी या पुनरीक्षणकर्ता की व्यक्तिगत उपस्थिति:- (1) प्रत्येक दशा में अपीलार्थी या पुनरीक्षणकर्ता को सुनवाई की तारीख के बारे में, ऐसी सुनवाई की तारीख से कम से कम 7 दिन पूर्व सूचित किया जायेगा। (2) यथास्थिति, अपीलार्थी या पुनरीक्षणकर्ता, अपील या पुनरीक्षण आवेदन की सुनवाई के समय स्वयं उपस्थित हो सकेगा या उपस्थित न होने का विकल्प ले सकेगा। (3) जहाॅैं यह समाधान हो जाता है कि ऐसी परिस्थितियाॅं विद्यमान हंै, जिनके कारण यथास्थिति आवेदक या अपीलार्थी सुनवाई में उपस्थित नहीं हो पा रहा है, वहाॅं अंतिम विनिश्चय किये जाने के पूर्व, अपीलार्थी अथवा पुनरीक्षणकर्ता को सुनवाई का एक अवसर प्रदान किया जायेगा या ऐसी कोई समुचित कार्रवाई की जा सकेगी, जो उचित समझी जाए। (4) यदि कोई पक्षकार उस पर सूचना की सम्यक् तामीली होने के पश्चात् उस तारीख को, जो सुनवाई के लिए नियत की गई है, अनुपस्थित रहता है, तो यथास्थिति, अपील अथवा पुनरीक्षण की आवेदन का उसकी अनुपस्थिति में निपटारा किया जा सकेगा या अनुपस्थिति के कारण, उसे खारिज किया जा सकेगा।

13. अपील अथवा पुनरीक्षण में आदेश - (1) अपील अथवा पुनरीक्षण आदेश खुली कार्रवाइयों में सुनाया जायेगा और यथास्थिति प्रथम अपील अधिकारी, द्वितीय अपील प्राधिकारी या पुनरीक्षण अधिकारी द्वारा लिखित में होगा । (2) प्रथम अपील आदेश की प्रति अपीलार्थी एवं पदाभिहित अधिकारी को दी जायेगी । (3) द्वितीय अपील आदेश की प्रति अपीलार्थी, पदाभिहित अधिकारी तथा प्रथम अपील अधिकारी को दी जायेगी । (4) शास्ति अधिरोपित किए जाने की दशा में द्वितीय अपील प्राधिकारी द्वारा ऐसे आदेश की प्रति संबंधित - (क) आहरण एवं संवितरण अधिकारी को, शास्ति की राशि प्रथम अपील अधिकारी के आगामी वेतन से वसूल करने के निर्देश के साथ, (ख) कोषालय को; तथा (ग) अनुशासनिक प्राधिकारी को पृष्ठांकित की जायेगी । (5) यथास्थिति पदाभिहित अधिकारी या प्रथम अपील अधिकारी के विरूद्ध विभागीय जांच की अनुशंसा किये जाने की दशा में, द्वितीय अपील प्राधिकारी, उसके विरूद्ध पारित आदेश के साथ, अपनी अनुशंसा संबंधित अनुशासनिक प्राधिकारी को भेजेगा । (6) जहाॅं पुनरीक्षण अधिकारी, पुनरीक्षण आवेदन की सुनवाई के पश्चात, द्वितीय अपील प्राधिकारी के आदेश में कोई संशोधन करता है वहां वह ऐसे आदेश की प्रति द्वितीय अपील प्राधिकारी तथा उपनियम (4) के अधीन विनिर्दिष्ट अधिकारियों को भेजेगा ।

14. शास्ति की वसूली - (1) आहरण एवं संवितरण अधिकारी, नियम 13 के उपनियम (4) के अधीन शास्ति अधिरोपित किये जाने के आदेश की प्रति प्राप्त होने पर, यथास्थिति, पदाभिहित अधिकारी या प्रथम अपील अधिकारी के आगामी वेतन से शास्ति की राशि को वसूल करेगा और उसे शीर्ष 0070 (60) (800) में जमा करेगा तथा चालान की एक प्रति संबधित द्वितीय अपील प्राधिकारी को भेजेगा । (2) यदि पुनरीक्षण में, द्वितीय अपील प्राधिकारी के आदेश में कोई संशोधन किया जाता है, तो संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी द्वारा ऐसे आदेश का पालन किया जायेगा ।

15. प्रतिकर का भुगतान - (1) धारा 7 की उपधारा (3) के अधीन आवेदक को प्रतिकर के भुगतान का आदेश होने की दशा में, द्वितीय अपील प्राधिकारी प्रतिकर का भुगतान 30 दिवस के भीतर करने का आदेश करेगा । (2) पुनरीक्षण में शास्ति की राशि में कोई संशोधन, प्रतिकर की राशि के भुगतान को प्रभावित नहीं करेगा ।

16. अधिनियम के अधीन निराकृत प्रकरणों के अभिलेख का संधारण - पदाभिहित अधिकारी, प्रथम अपील अधिकारी, द्वितीय अपील प्राधिकारी तथा पुनरीक्षण अधिकारी प्ररूप 3, 4, 5 तथा 6 में प्रकरणों का अभिलेख संधारित करेगा ।

17. मानीटरिंग एवं निरीक्षण - राज्य सरकार, अधिनियम के उपबंधों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए, अधिनियम के अधीन प्रस्तुत किये गये प्रकरणों की मानीटरिंग तथा प्रथम अपील अधिकारी, द्वितीय अपील प्राधिकारी, पुनरीक्षण अधिकारी तथा आहरण एवं संवितरण अधिकारी के कार्यालायों के निरीक्षण के लिए, समय-समय पर निर्देश जारी कर सकेगी ।